26 May 2005

हाइकु समीक्षा

  • अनुभूति का होली हाइकु अंक : एक प्रतिक्रिया
अनुभूति के होली अंक में हिन्दी हाइकु कविता की उपस्थिति सुखद लगी. इनमें अधिकतर प्रवासी भारतीयों के हिन्दी हाइकु हैँ। ये हाइकु देखकर मन प्रफुल्लित हो उठा. जिन हाइकुकारों की हाइकु कविताओं का चयन किया गया है वे सभी बहुत अच्छे हाइकु हैं और स्वयं में परिपूर्ण हैं। ऍसा लगता है कि इन्हें अत्यंत सधे हुए हाइकुकारों ने रचा हैं. कुछ हाइकु जो मुझे अच्छे लगे प्रत्यक्षा का हाइकु—
टेसू के रंग
फागुन की उमंग
बौराया मन।
स्तरीय हाइकु है। टेसू के रंग और फागुन की उमंग जब ये दोनों मिल जाते हैं तो मन का बौराना स्वाभाविक है। इस मनः स्थिति को चित्रित करने में हाइकुकार को सफलता मिली है। लावण्या का हाइकु—
महुआ गंध
फागुन में उमंग
मन पतंग।
—सच ही है जब महुआ गंध और ‘फागुनी उमंग’ वातास में घुल जाती है तो मन कल्पनाओं के अश्व पर सवार हो जाता है। पतंग के समान विचरण करने लगता है। इसी भावानुभूति को बाँधने में हाइकुकार के सफल हुआ है। मनोशी चैटर्जी ने—
बिछा पलाश
फागुन बिखेरता
रंग गोधूली।
—में जो बिम्ब उकेरा है‚ वह दृश्य उसकी आँखों के समक्ष साकार हो उठेगा‚ जिसने पलाश वन देखा है, पलाश को फूलते और झड़-झड़ कर बिछते देखा है। पलाश —पुष्प झड़—झड़ कर ऍसे बिखर जाते हैं मानो रंगोली सजी हो। इस मखमली अहसास को बाँधने का हाइकु में सफल प्रयास किया गया हैं। अनूप भार्गव के हाइकु में फागुनी वातास के साथ—साथ कुछ गहन मानवीय चिन्तन जुड़ गया है जिसमें हाइकु गंभीर हो गया है। मातृभूमि की सुखद स्मृति और उससे जुड़ी तमाम यादें हमारे अन्तस में रची—बसी हैं। इनसे बिलग होना बड़ा कठिन हैँ। वास्तव में यह पीड़ा एक प्रवासी ह्रदय ही समझ सकता है—
फागुनी हवा
गुनगुनी-सी धूप
लौटना तो है।
राकेश खण्डेलवाल भी हाइकु में स्मृतियों को संजोकर प्रस्तुत करते हैं—
लौटे बहार
कब आपके साथ
प्रतीक्षा यही।
-मानव मात्र के बीच आपसी प्रेम-भाव बना रहें‚ इसका प्रयास साहित्य में हमेशा किया जाता है। देवी नंगरानी ने अपने हाइकु के द्वारा यही संदेश दिया है–
बीज खुशी के
खाद के संग प्यार
इसमें बो दो।
-दुनिया में सुख और शान्ति के लिए खुशी के बीज और उसमें प्यार की खाद हो तो निश्चय ही जो पौधे उगेंगे वे आपस में मिलकर रहेंगे। यही एक कवि की आकांक्षा है, यही हमारी संस्कृति है और यही हमने बचपन से सीखा है। नीलम जैन का हाइकु—
रंगों के ढ़ँग
लहरों का घुलना
नदिया संग ।
-जीवन के शाश्वत दर्शन को प्रतिबिम्बित करता है । सभी हाइकुकारों को अच्छे हाइकु लिखने के लिए बधाई । अंक की प्रस्तुति बहुत कलात्मक और प्रभावक ह। भविष्य में और श्रेष्ठ हाइकु कविताओं का सृजन करें यही आप सब से अपेक्षा है और यही शुभकामनाएँ भी ।
-डॉ॰ जगदीश व्योम
संपादक
हाइकु दर्पण

2 Comments:

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