13 April 2005

ई गोष्ठी दि॰ १५ मई २००५

इंटरनेट पर हिन्दी के बढ़ते चरण
इंटरनेट पर हिन्दी का प्रयोग दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। एक समय था जब नेट पर हिन्दी बहुत कम देखने को मिलती थी, परन्तु आज स्थिति तेजी से बदली है। भारत के मध्य प्रदेश स्थित होशंगाबाद में इसी विषय को लेकर एक ई–गोष्ठी दिनांक १५–०५–२००५ को सायं ५ बजे स्थानीय ई पब्लिक लाइब्रेरी में की गई। गोष्ठी में यह दिखाने का प्रयास किया कि अन्तर्जाल पर हिन्दी की उपस्थिति को अधिकांश लोग सुनते तो रहते हैं पर देखते बहुत कम हैं, इसे सार्वजनिक रूप से देखा और दिखाया जाना चाहिये। किसी भी गाँव या शहर के साहित्यकार इंटरनेट पर अपनी कविताओं के माध्यम से आ सकते हैं, यह इस गोष्ठी में दिखाया गया और इस महान कार्य को विदेशों में रहकर करने वाले हिन्दी प्रेमी कर्मवीरों के द्वारा किए जाने वाले महत्वपूर्ण कार्यों की भी चर्चा की गई जिन्होने ब्लाग स्पाट के द्वारा हिन्दी प्रयोग के नए द्वार खोले हैं। इस आशय से डॉ॰ व्योम द्वारा तैयार किया गया होशंगाबाद के कवियों की कविताओं का काव्य संकलन नर्मदा तीरे का लोकार्पण कर प्रदर्शन किया गया। गोष्ठी की मुख्य अतिथि थीं होशंगाबाद की डिप्टी कलेक्टर श्रीमती अलका श्रीवास्तव और विशिष्ट अतिथि थे प्रतिभूति कागज कारखाना के प्रबंधक श्री राकेश कुमार। गोष्ठी में प्रवासी भारतीयों—प्रो॰ अश्विन गाँधी, पूर्णिमा वर्मन, देवाशीष, अतुल अरोरा एवं उनकी पूरी टीम, रमन कौल, जितेन्द्र चौधरी आदि की सराहना की गई। इन्हीं सब के प्रयास से इंटरनेट पर हिन्दी का प्रयोग सुलभ होता जा रहा है। हिन्दी के लिये प्रयुक्त हो रहे अनेक फोन्ट यदि एक फोन्ट के रूप में समाहित हो सकें तो फिर क्या कहने ........। यह अपेक्षा भी की गई। जी मेल पर हिन्दी में ई मेल की सुविधा, ब्लाग स्पाट पर हिन्दी का आसान प्रयोग होने से हिन्दी प्रयोग के क्षेत्र में नई क्रान्ति का सूत्रपात हुआ है। नर्मदा तीरे जैसे काव्य संकलन अन्य हिन्द प्रेमियों को इंटरनेट की ओर आकर्षित करेंगे। गोष्ठी में अनुभूति की संपादक पूर्णिमा वर्मन अपने वेब कैमरा के साथ उपस्थित थीं। इस अवसर पर अनुभूति, अभिव्यक्ति, अक्षरग्राम, निरंतर, कविता सागर, हिन्दी साहित्य, हाइकु दर्पण, हास्य महेश, हिन्दी कोंपल, गजलकमल, हिन्दी नेस्ट, होशंगाबाद के कवि, विमर्श, बालफुलबारी, नर्मदा तीरे आदि जाल पत्रकाओं को सभी ने देखा और इनकी भरपूर सराहना की।

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